Uncategorized कर्मवीर समूह ज़रा हटके देश बड़ी ख़बरें मध्य-प्रदेश

महाराज को ‘थका’ रहे हैं संघ-भाजपा-शिवराज..!

महाराज को ‘थका’ रहे हैं संघ,भाजपा,शिवराज..!

० महीनों बाद भी मंत्री पद का ‘पाग’ सिर
पर बंधने का इन्तिज़ार कर रहे हैं सिंधिया

० अपने ‘हरल्लों’ को गाड़ी-घोड़ा दिलवाने के
लिये लश्कर लेकर भोपाल में दबिश दे रहे

० दुबारा जीत कर आये तुलसी और गोविंद
तक को मंत्री बनाने में शिवराज की टालमटोल

० डॉ राकेश पाठक

भोपाल। ‘सदलबल’ दलबदल करके ‘कमल दल’ की सरकार बनवाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया सारे कस बल लगाने के बाद भी बेचैन हैं। बेचैनी की वजह है संघ, भाजपा और शिवराज के बदले बदले से तेवर। सत्ता,संगठन में अपने हिस्से की बाट जोह रहे सिंधिया को सरकार और संगठन थकाने की रणनीति पर चल रहे हैं।इसके चलते सिंधिया के सब्र का बांध गले तक भर आया लगता है।
बीते मार्च महीने में दलबदल करके सरकार बनवाने वाले सिंधिया उप चुनाव के बाद उतावले दिख रहे हैं। लेकिन उपचुनाव में ग्वालियर-चंबल में सिंधिया समर्थकों की हार ने भाजपा-शिवराज को अपने चेहरे के तेवर बदलने का मौका दे दिया है।
यही वजह है कि न तो अब तक सिंधिया के सिर पर केंद्र में मंत्री पद का ‘पाग’ बंधी है और न उनके कोटे से मप्र में मंत्री
शपथ ले पा रहे हैं।
(मराठा सिर पर जो पगड़ी पहनते हैं उसे ‘पाग’ कहा जाता है।)

मार्च में दलबदल के बाद अब नौ महीने का ‘प्रसव-काल’ भी पूरा हो चला है लेकिन दिल्ली में शपथ की ‘डिलीवरी’ का अब तक इन्तिज़ार ही हो रहा है।
संघ-संस्कृति में दक्ष होने के लिये नागपुर में संघ मुख्यालय ‘हेडगेवार भवन’ में संघ सुप्रीमो मोहन भागवत की देहरी पर ढोक लगाने से लेकर भोपाल में संघ के ठिये ‘समिधा’ तक की परिक्रमा का सुफल अभी भविष्य के गर्त में ही है। समिधा में संघ के क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते से तीन बार की सौजन्य भेंट भी
हां, हूँ ,जी बेहतर है,अच्छा,देखते हैं से आगे नहीं बढ़ी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की चौखट से भी जल्द कोई अच्छी ख़बर आती नहीं दिख रही। सिंधिया को राज्यसभा में आमद दिये हुए महीनों हो रहे हैं लेकिन अब तक आस निरास ही दिख रही है।

सिंधिया पर दूसरा दवाब अपने समर्थकों को सत्ता,संगठन में बिठाने का है। इसके लिये वे पिछले एक महीने में तीन बार फौज़-फाटे के साथ भोपाल में दबिश दे चुके हैं।
पिछले दौरे में दर्जनों गाड़ियों और सैकड़ों समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज के श्यामला हिल्स निवास पर चढ़ाई की।इसके बावजूद हारे हुओं को तो दूर उपचुनाव जीत कर आये तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत जैसे खासमखास सिपहसालारों तक को मंत्री नहीं बनवा पा रहे।

बदले हुए तेवर का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिवराज सिंह ने अपने ‘सम्मान’ के अति आग्रही सिंधिया को एक बार 40 मिनट इन्तिज़ार करवा दिया।
पिछली दफ़ा भी शिवराज मुख्यमंत्री आवास में सिंधिया को पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ छोड़ कर चले गए । बताया गया कि शिवराज को ‘निजी काम’ से कहीं जाना है।

सिंधिया का राज हठ यह भी है कि उनके ‘हरल्लों’ को भी निगम,मंडल के कमान सौंप कर गाड़ी घोड़ा से नवाज़ा जाए। उनके तीन समर्थक मंत्री इमरती देवी,गिर्राज दंडोतिया और एदल सिंह कंसाना उप चुनाव हार गए हैं।
इमरती अब भी बिना विधायक मंत्री बनी हुई हैं और कैबिनेट की बैठक तक में ठप्पे से विराजती हैं।

हारे हुए नेताओं को निगम-मंडल में नवाज़ने की बात से भाजपा के निष्ठावान नेता-कार्यकर्ता अभी से भृकुटि तान रहे हैं। ख़ुद भाजपा में पांच सात बार जीत चुके विधायक
अपनी बारी का इन्तिज़ार ही कर रहे हैं।ऐसे विधायकों की संख्या कम नहीं है जो सिंधिया खेमे को ‘एडजस्ट’ करने के फेर में ठन ठन गोपाल रह जाएंगे। इनका आक्रोश भी भाजपा-शिवराज को सिंधिया के लिये कुछ भी करने से रोक रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने साथ आये कार्यकर्ताओं को संगठन में भी जगह दिलवाने की कोशिश कर रहे हैं जिसके लिये संघ,संगठन अभी बिल्कुल तैयार नहीं है।
पिछले महीनों में कई दौर की बातचीत के बाद भी इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।

फिलहाल संघ, भाजपा,शिवराज की तिकड़ी सिंधिया को दौड़ा दौड़ा कर थकाने की रणनीति पर चल रहे हैं। सत्ता और संगठन में सिंधिया के ग़ैर-ज़रूरी दख़ल को पहली ही पायदान पर ढीला करने के लिये उनकी किसी भी मांग को ज्यादा तवज्जो न देकर उनकी बेचैनी बढ़ने देना इसी रणनीति का हिस्सा है।
यही वजह है कि दलबदल के समय आला कमान के साथ हुई ‘डील’ पूरी करने के लिये ‘दिल्ली’ से भी कोई अतिरिक्त आग्रह ‘भोपाल’ नहीं आ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *