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माखनलाल चतुर्वेदी का बाबई हुआ ‘माखन नगर’

34 वर्ष बाद विधानसभा का संकल्प फलीभूत

34 वर्ष बाद विधानसभा का संकल्प फलीभूत

भोपाल / ‘एक भारतीय आत्मा’ दादा माखनलाल चतुर्वेदी की जन्मभूमि बाबई अब ‘माखन नगर’ नाम से जानी जाएगी। दादा के एक सौवें जन्मदिन पर 4 अप्रैल 1988 को मध्यप्रदेश विधानसभा में चतुर्वेदी जी का पुण्य स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह, नेता प्रतिपक्ष श्री कैलाश जोशी तथा अध्यक्ष श्री राजेन्द्र शुक्ल ने तदाशय का संकल्प सर्वानुमति से घोषित किया था। परन्तु प्रक्रिया की भूलभुलैया में संकल्प ठण्डे बस्ते में पड़ा रहा। अब मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर यह ऐतिहासिक संकल्प साकार हो गया है।

सप्रे संग्रहालय के संस्थापक-संयोजक विजयदत्त श्रीधर ने बताया कि दादा की शताब्दी को उनके कालजयी अवदान की गरिमा के अनुरूप सम्मान देने के लिए बाबई में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर जनसभा के मंच से यह अनुरोध किया था। संकल्प के क्रियान्वयन में विलम्ब होने पर बाबईवासियों ने दुकानों के बोर्डों पर, निजी पत्र व्यवहार में और पत्रकारों ने खबरों में माखन नगर का प्रयोग शुरू कर दिया था। सौ साल पूरे होने पर दादा की कर्मभूमि खण्डवा में विशाल कार्यक्रम आयोजित हुआ। 4 अप्रैल 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की। श्री लक्ष्मीमल सिंघवी और श्री प्रभाष जोशी की पहल पर अगले ही वर्ष यह घोषणा क्रियान्वित हो गई। यह एशिया में पत्रकारिता का पहला विश्वविद्यालय बना।

दादा माखनलाल चतुर्वेदी हिन्दी में राष्ट्रीय काव्य धारा के प्रवर्तक माने जाते हैं। हिन्दी-पत्रकारिता को तेजस्वी तेवर उन्होंने प्रदान किए। स्वतंत्रता संग्राम का महाकोशल में नेतृत्व किया। रतौना कसाईखाना के खिलाफ प्रबल आन्दोलन कर फिरंगी हुकूमत को झुकाया। झण्डा सत्याग्रह का सफल नेतृत्व किया।

सप्रे संग्रहालय ने बाबईवासियों तथा मध्यप्रदेश के सुधी नागरिकों की इस अभिलाषा को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार माना है।

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