भाजपाई ‘महाराज’ को बीस साल बाद याद आईं दादी विजयाराजे सिंधिया..!


० जयंती पर ‘अम्मा महाराज’ की
छत्री पर बड़ा जलसा 12 को

० बुआ यशोधरा राजे शामिल नहीं
होंगीं भतीज़े के इस कार्यक्रम में


०डॉ राकेश पाठक

ग्वालियर। केंद्रीय नागरिक विमानन और उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीस साल बाद अपनी दादी विजयाराजे सिंधिया की जयंती याद आ गयी है। जीते जी अपनी दादी ‘अम्मा महाराज’
से मुक़दमेबाजी करने वाले नए नवेले भाजपाई सिंधिया अब उन्हें तामझाम के साथ फूल चढ़ाने आ रहे हैं।
उनकी ओर से पहली बार मंगलवार 12 अक्टूबर को ग्वालियर में ‘राजमाता’ की छत्री पर बड़ा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। उधर विजयाराजे सिंधिया की पुत्री 24 अक्टूबर को पुष्पांजलि का कार्यक्रम आयोजित करेंगीं।वे ज्योतिरादित्य के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगीं।


भूतपूर्व सिंधिया राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जन्म दिन 12 अक्टूबर को होता है। हिन्दू कलेंडर की तिथि के अनुसार उनका जन्म करवाचौथ के दिन हुआ था। इसी तिथि अनुसार उनकी जयंती मनाई जाती रही है।

अब तक उनकी पुत्री मप्र सरकार में मंत्री यशोधरा राजे अपनी मां की जयंती और पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि का कार्यक्रम आयोजित करती रहीं हैं।

यधोधरा राजे हमेशा करवाचौथ के दिन ही ‘अम्मा महाराज’ को श्रद्धांजलि का कार्यक्रम आयोजित करतीं हैं। इस बार भी करवाचौथ के दिन 24 अक्टूबर को उनका कार्यक्रम तय है।

इससे पहले ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से 12 अक्टूबर को ग्वालियर में ‘राजमाता’ की जयंती का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है।

कटोराताल रोड स्थित सिंधिया घराने की छत्री पर यह कार्यक्रम मंगलवार को सुबह आयोजित होगा। सिंधिया इस कार्यक्रम के लिये नियमित उड़ान से दिल्ली से ग्वालियर पहुंच रहे हैं। संभाग भर से क़रीब दो,ढाई हजार कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाई जा रही है। जयविलास पैलेस से आसपास के जिलों में फोन करके कार्यकर्ताओं को आने के लिये कहा गया है।

शहर में सैकड़ों होर्डिंग लगाए गए हैं जिनमें सिंधिया के साथ दलबदल करके आये नए नवेले भाजपाइयों के चेहरे ही ज्यादा हैं। राजमाता या यशोधरा समर्थकों की होर्डिंग,बैनरों पर कोई विशेष भागीदारी नहीं दिख रही। इस आयोजन को भाजपा या सिंधिया परिवार के बजाय नए नए भाजपाई ज्योतिरादित्य सिंधिया का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।

सियासी हलकों में चर्चा है कि राजमाता के 2001 में निधन के बाद से ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से कभी कोई औपचारिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। अब से पहले वे अपनी दादी की जयंती या पुण्यतिथि पर अपवाद स्वरूप ही एकाध बार छत्री पर आए हैं।
इससे पहले कभी भी उनके समर्थकों ने विजयाराजे सिंधिया के किसी दिन विशेष पर कभी होर्डिंग,बैनर नहीं लगाए।

कहा जा रहा है कि दलबदल करके भाजपा में
शामिल होने के बाद ही उन्हें अपनी दादी की याद आयी है। यह भी किसी से छुपा हुआ नहीं है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपनी दादी और बुआओं वसंधुरा राजे,यशोधरा राजे से सम्पत्ति को लेकर विवाद रहा है। कुछ मामले अब तक अदालत में लंबित हैं।

उल्लेखनीय है कि सिंधिया मार्च 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुये थे। अब सिंधिया ने पारिवारिक रिश्ते को भी सियासत के तानेबाने के अनुसार निभाना शुरू किया है। जीवन भर कांग्रेस में रहे अपने दिवंगत पिता माधवराव सिंधिया की तस्वीर को भी अब भाजपा के पोस्टर, बैनर पर मोदी शाह के साथ लगवाया जाता है।
इसी कड़ी में अब वे भाजपा की संस्थापक सदस्यों में शामिल अपनी दादी को फूल चढ़ाने आ रहे हैं।

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