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बाहरी दिल्ली में शाम होते ही निकल जाता है सोशल डिस्टेंसिंग का दम

नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)| कोरोनावायरस को हराने के लिए अधिकांश दिल्लीवासी सोशल डिस्टेंसिंग के महत्व को अब समझने लगे हैं। लेकिन कुछ हैं, जो अब भी घर से निकलने से बाज नहीं आ रहे हैं। सुबह के समय दूध, ब्रेड इत्यादी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करके लोग घरों में चले जाते हैं लेकिन शाम को बाहरी दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में सोशल डिस्टेंसिंग का दम निकल जाता है।

पश्चिमी दिल्ली के एक बड़े हिस्से में लोग जरूरी सामानों के लिए स्थानीय दुकानों और फल तथा सब्जियों के लिए साप्ताहिक बाजारों पर निर्भर रहते हैं। लॉकडाउन के बाद अब साप्ताहिक बाजार नहीं लग रहे हैं तो फल एवं सब्जियों की किल्लत महसूस की जाने लगी है।

आईएएनएस भी बुधवार को खबर चलाई थी कि फलों एवं सब्जियों के सबसे बड़े बाजार आजादपुर में पहले जैसी खरीदारी नहीं हो रही है। ऐसे में डिमांग एवं सप्लाई के थिएरी को देखते हुए फलों एवं सब्जियों की कीमतें बढ़नी लाजमी हैं।

यह अच्छी बात है कि अधिकांश स्थानीय दुकानदारों ने पुलिस की सख्ती के कारण अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को जबरन लागू कर दिया है और लोग अपनी जान की खातिर इसे मानने भी लगे हैं लेकिन जब फल एवं सब्जियां खरीदने की बात आती है तो लोग जान की परवाह किए बगैर सब्जी एवं फल के ठेलों पर टूट पड़ते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है क इस दौरान लोग मास्क भी नहीं लगाते। मास्क न लगाने को लेकर महिलाओं में अधिक लापरवाही है।

बाहरी दिल्ली को यह फायदा है कि यहां कई स्थानीय फल एवं सब्जी विक्रेता ठेलों पर सामान लेकर कालोनियों की फेरी करते हैं। साप्ताहिक बाजारों के लगने तक इनकी संख्या न के बराबर होती थी लेकिन अब इनकी संख्या कई गुना बढ़ गई है। चुंकी इन्हें फल एवं सब्जियां बेचने की इजाजत है लिहाजा एक-एक कालोनी में दर्जनों फेरी वाले शाम के वक्त डेरा डाल लेते हैं। इन्हें देखते ही लोग मधुमक्खी की तरह इन्हें छाप लेते हैं।

फल एवं सब्जी विक्रेता सामान महंगा भी बेचते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को लेकर भी बेपहवाह या फिर लापरवाह हैं। एोसे में पूरे दिन सोशल डिस्टेंसिंग और लोगों को घरों में कैद रखने के दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सारे प्रयासों की शाम होते-होते हवा निकल जाती है।

दिल्ली पुलिस की जिप्सी शाम को इन कालोनियों में राउंड लगाती है और लोगो को एक दूसरे से दूर रहने के लिए आगाह भी करती है। एक पल के लिए तो लोग एक दूसरे से दूर चले जाते हैं लेकिन जिप्सी के जाते ही वे फिर बेकाबू हो जाते हैं। स्थानीय दुकानदारों की लापहवाही, बेपरवाही और लालच का यह आलम है कि नवरात्र पर कई दुकानदार पूजा की सामग्री दुकानों के बाहर लगाए नजर आए। लोगों ने जमकर खरीदारी की और अब भी कर रहे हैं। यह आलम तब है जब पूजा सामग्री जरूरी सामानों की श्रेणी में नहीं आता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तमाम अपीलों के बावजूद लोग एक दूसरे से दूरी नहीं बना रहे हैं। ऐसे में सरकार को मजबूरन धारा 144 को सख्ती से लागू करना पड़ सकता है, जो पूरी दिल्ली को भारी पड़ सकता है।

वैसे लोगों की लापरवाही और बेपरवाही के लिएस्थानीय सरकार भी जिम्मेदार है। 22 तारीख को जनता करफ्यू था और 23 से सम्पूर्ण लॉकडाउन घोषित किया गया। 22 मार्च को ही लोगों ने हर जगह खरीदारी की। 23 मार्च से स्थानीय दुकानों में जरूरी सामानों जैसे कि आटा, चावल, चीनी और तेल की आपूर्ती कम होने लगी जबकि सरकार ने कहा था की जरूरी सामान की कमी नहीं होने दी जाएगी।

दिल्ली के लोग जानते हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है लेकिन पेट भरने की मजबूरी उन्हें एक दूसरे के करीब ला रही है। दिल्ली पुलिस भी लोगों की मजबूरी समझती है और यही कारण है कि वह चाहकर भी शाम को कड़े कदम नहीं उठा पा रही है। इससे कोरोनावायरस के तेजी से फैलने का खतरा है, जो बाहरी दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरी दिल्ली या फिर पूरे देश को भारी पड़ सकता है।

 

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