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दिल्ली सरकार के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा डूसू

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ने दिल्ली सरकार द्वारा डीयू के राज्य वित्तपोषित कॉलेजों के टीचिंग तथा नॉन टीचिंग स्टाफ का वेतन अवैध ढंग से स्टूडेंट्स सोसायटी फंड से दिए जाने के निर्णय के खिलाफ आईटीओ मेट्रो स्टेशन से दिल्ली सचिवालय तक मार्च निकाला। प्रदर्शन में शामिल 50 छात्रों को दिल्ली सचिवालय के बाहर हिरासत में ले लिया गया। हालांकि बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।

डूसू अध्यक्ष अक्षित दहिया ने कहा, “कोरोना काल में पहले से ही छात्र परेशान हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार लगातार छात्रों को अलग-अलग तरीकों से परेशान करने का काम कर रही है। हमने राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित कॉलेजों के छात्र प्रतिनिधियों तथा एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज सोसाइटी के प्रतिनिधियों से बात की है, वे भी सरकार के इस छात्र विरोधी निर्णय के खिलाफ हैं। हम इस निर्णय के खिलाफ न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे।”

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इस प्रदर्शन में पुलिस ने दो बार छात्रों को रोका। छात्रों के न रुकने पर कई छात्रों को सचिवालय पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया। बावजूद इसके छात्रों ने दिल्ली सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया और दिल्ली सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तथा दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के नेतृत्व में इस प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने दिल्ली सरकार द्वारा 16 अक्टूबर को स्टूडेंट्स सोसाइटी फंड से वेतन दिए जाने संबंधी निर्णय को तुरंत वापस लिए जाने की मांग की। विश्वविद्यालय छात्र संघ ने कहा, “स्टूडेंट्स सोसाइटी फंड छात्रों से फीस के रूप में लिया गया है, तथा इस फंड का उपयोग छात्रों से जुड़ी हुई विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के संदर्भ में खर्च किया जाना चाहिए, न कि वेतन दिए जाने के लिए।”

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मंत्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि, “छात्रों के रचनात्मक विकास के लिए निर्धारित फंड को यदि किसी दूसरे मद में खर्च कर दिया जाएगा, तो निश्चित रूप से छात्रों के साथ में यह बहुत बड़ा धोखा है। हम अपनी मांगों के पूरा होने तक इस निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखेंगे।”

–आईएएनएस

जीसीबी/एएनएम

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