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कार्बन तटस्थता की प्रक्रिया को गति देगा चीन

बीजिंग, 7 मार्च (आईएएनएस)। चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने कहा कि चीन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन और कार्बन तटस्थता पर बहुत ध्यान देता है। चीन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन और कार्बन तटस्थता से संबंधित सभी कार्यो को अच्छी तरह से पूरा करेगा। साथ ही चीन पारिस्थितिक पर्यावरण शासन को बढ़ाना जारी रखेगा।

चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) के उद्घाटन समारोह में सरकारी कार्य रिपोर्ट देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चीन प्रदूषण की रोकथाम और पारिस्थितिकी निर्माण को मजबूत करेगा, निरंतर रूप से पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार करेगा। चीन पूरे देश में सतत विकास नीति को गहराई से लागू करेगा, नीले आकाश, साफ पानी व शुद्ध भूमि की बचाव कार्यवाइयों का उपलब्धियों को समेकित करेगा और उत्पादन व जीवन शैली का हरित संक्रमण को बढ़ाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, आगामी पांच वर्षो में चीन वर्ष 2030 तक जलवायु परिवर्तन के मुकाबले के लिए राष्ट्रीय योगदान का लक्ष्य साकार करेगा। जीडीपी की प्रति यूनिट ऊर्जा की खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में क्रमश: 13.5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की कटौती करेगा। वहीं, वन आवरण दर 24.1 प्रतिशत पहुंचाने का लक्ष्य रखेगा।

पिछले 22 सितंबर को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु कार्रवाई के प्रति वादा किया कि चीन अपने कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन को वर्ष 2030 से पहले चरम पर पहुंचाने और वर्ष 2060 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करने के लिए जोरदार कदम उठाएगा।

विदेशी नेताओं और विशेषज्ञों ने कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन और कार्बन तटस्थता समेत वैश्विक जलवायु परिवर्तन नियंत्रण क्षेत्र में उत्तरदायी चीन का सक्रिय मूल्यांकन किया।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री विन रुड ने कहा कि कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन और कार्बन तटस्थता मुद्दा न केवल सभी लोगों के जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है, बल्कि मानव के भविष्य से संबंधित समस्या भी है। कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन और कार्बन तटस्थता मुद्दों समेत वैश्विक जलवायु परिवर्तन क्षेत्र में चीन नेतृत्वकारी स्थिति में है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय चीन के ग्रीन विकास की अवधारणा पर और अधिक ध्यान देता है। वे जलवायु क्षेत्र में चीन की नेतृत्व क्षमता देखने के लिए तत्पर हैं।

वहीं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री के सहायक एवं न्यू दक्षिण एशिया फोरम के संस्थापक सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि चीन जलवायु परिवर्तन के सामने प्रतिभागी एवं योगदानकर्ता और वैश्विक जलवायु परिवर्तन नियंत्रण को बढ़ाने के लिए अग्रदूत है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित मानव भाग्य समुदाय का संयुक्त निर्माण मानव सामूहिक ज्ञान का स्पष्टीकरण है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन नियंत्रण को मजबूत करने के लिए चीन के प्रयास और योगदान चीन की जिम्मेदारी भावना को दर्शाते हैं।

4 और 5 मार्च को चीन की शीर्ष विधायिका राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) और चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) के दो सत्रों में एनपीसी और सीपीपीसीसी के सदस्यों ने अपील की कि वर्तमान में चीनी प्रौद्योगिकी उद्यमों की कार्बन तटस्थता को हासिल करने को बढ़ाया जाना चाहिए। यह उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रतीक है। भविष्य में कम कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण के दौरान चीन महान विकास अवसर प्राप्त कर सकेगा।

बताया जाता है कि इस जनवरी में चीन के विभिन्न प्रांतों में आयोजित दो सत्रों में इसकी घोषणा हुई कि वर्ष 2021 में वे कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन और कार्बन तटस्थता से संबंधित परियोजनाएं बनाएंगे। अब तक पूरे देश में लगभग 30 प्रांतों, नगर पालिका शहरों और स्वायत्त क्षेत्रों ने संबंधित परियोजनाएं शुरू की हैं।

विशेषज्ञों और विद्वानों को लगता है कि पिछले 5 से 10 साल में चीन की प्रांतीय सरकारें ऊर्जा संरचना को समायोजित और अनुकूलित करने पर ध्यान देंगी। वे ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संरक्षण उद्योग का विकास करेंगी और ऊर्जा की बचत और कम कार्बन वाले उत्पादों का उपयोग करने को बढ़ाएंगी।

इसके अलावा, पूरे देश में एकीकृत कार्बन उत्सर्जन व्यापार बाजार का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय आम अभ्यास है। चीन को बाजार क्रियाविधि के माध्यम से चीनी उद्यमों को ऊर्जा की बचत और कार्बन कटौती के उपाय उठाने को बढ़ाने की आवश्यकता है।

वैश्विक गांव के सदस्य की तरह चीन अपनी वास्तविक कार्रवाइयों से वैश्विक जलवायु परिवर्तन नियंत्रण में सक्रिय योगदान करेगा।

(साभार : चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

–आईएएनएस

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