बिजनेस

स्टार्ट-अप्स और उद्यमियों के लिए ‘द ग्रोथ हैकिंग’ पुस्तक का विमोचन

 नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)| स्टार्ट-अप्स और उद्यमियों के लिए ‘द ग्रोथ हैकिंग बुक’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक स्टार्ट-अप्स के विपणन एवं स्केलिंग पर जोर देती है।

  यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं तेजी से कारोबार का पैमाना बढ़ाने के नए अभिनव तरीकों पर रोशनी डालती है। यह नई पीढ़ी के उद्यमियों, विकास रणनीतिकारों के ग्रोथ सेट (कौशल, मानसिकता एवं उपकरणों का संयोजन) को नए आयाम देती है। इस अवसर पर नीति आयोग के निदेशक डॉ उन्नत पंडित ने कहा, “भारतीय उद्यमिता प्रणाली तेजी से विकसित हो रही है और सरकार इस प्रणाली को सकारात्मक बनाने के लिए प्रयासरत है। बड़ी संख्या में मानव संसाधन एवं उद्यमिता उर्जा के साथ हमें भारतीय स्टार्ट-अप्स में अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं, जो सम्पूर्ण उद्यमिता प्रणाली के लिए सकारात्मक संकेत है।”

संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक अत्यधुनिक बिजनेस कन्सलटिंग प्लेटफार्म ग्रोथ मीडिया डॉट एआई के संस्थापक पारूल अग्रवाल और रोहण चौबे ने शनिवार को इंटरनेशनल ग्रोथ हैकिंग दिवस का ऐलान किया। उनकी पुस्तक ‘द ग्रोथ हैकिंग’ आज के उच्च प्रतिस्पर्धी कारोबार वातावरण में मौजूदा नियमों को चुनौती देती है और आधुनिक विकास के मार्ग प्रशस्त करती है।

ग्रोथ मीडिया डॉट एआई द्वारा निर्मित यह पुस्तक दुनिया भर से 35 से अधिक विपणन विशेषज्ञों, उद्यमियों, उद्योग जगत के विचारकों तथा सफल कंपनियों पर रोशनी डालती है, जिन्होंने पुस्तक के माध्यम से बताया है कि आप कैसे गैर-पारंपरिक विपणन रणनीतियों के द्वारा अपने कारोबार को बढ़ा सकते हैं।

यह ग्रोथ हैकिंग पर अपनी तरह की पहली पुस्तक है, जिसमें 35 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय उद्यमियों, विपणकों, प्रभाकारियों, विचारकों और सफल कंपनियों के विचारों को प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में योगदान देने वाले दिग्गजों ने उन रहस्यों को उजागर किया है जो सिलिकॉन -वैली स्टार्ट-अप्स के विकास को बढ़ावा देते हैं।

पुस्तक के बारे में लेखक पारूल अग्रवाल और रोहण चौबे ने कहा, “अब तक भारतीय स्टार्ट-अप प्रणाली वित्तपोषण, विकास एवं विपणन के पारंपरिक तरीकों को अपनाती रही है। हमने पाया है कि 90 फीसदी भारतीय स्टार्ट-अप अपने पहले पांच सालों में असफल हो जाते हैं (आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू एण्ड ऑक्सफोर्ड इकोनोमिक्स)। हमारा बुनियादी ढांचा और रणनीतियां ऐसी हैं जो स्टार्ट-अप के दीर्घकालिक विकास की गारंटी देती हैं। इन्हें फेल-प्रूफ कहा जा सकता है क्योंकि इन्हें सिलिकॉन वैली में आजमाया जा चुका है और अब हम इसे भारत ला रहे हैं।”

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