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सुप्रीम कोर्ट 2-जी स्पेक्ट्रम मामले में खंडपीठ का गठन करेगा

नई दिल्ली, 4 दिसम्बर (आईएएनएस)| सुप्रीम कोर्ट 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले से जुड़ी अर्जियों से निपटने के लिए जनवरी में एक खंडपीठ का गठन करेगा। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और द्रमुक सांसद कनिमोझी सहित सभी को बरी कर दिया था। अदालत ने बुधवार को कहा, “हम जनवरी में खंडपीठ का गठन करेंगे।”

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ से 2-जी मामले से संबंधित विभिन्न दलीलों से निपटने के लिए एक खंडपीठ गठित करने का आग्रह किया।

वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर की गई विभिन्न अपीलों पर सुनवाई कर रहा है।

नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने 2-जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों के आवंटन में अनुमानित नुकसान 1.76 लाख करोड़ रुपये का बताया था।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने 2-जी घोटाले की जांच की निगरानी की थी और फरवरी 2012 में राजा द्वारा दिए गए लाइसेंस को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था कि लाइसेंस असंवैधानिक तरीके से जारी किए गए थे।

लाइसेंस रद्द करने के बावजूद ट्रायल कोर्ट ने राजा, कनिमोझी और अन्य के खिलाफ मामलों में कोई आधार नहीं पाया।

ईडी मामले में बरी किए गए लोगों में द्रमुक सुप्रीमो एम. करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्मल, विनोद गोयनका, आसिफ बलवा, फिल्म निर्माता करीम मोरानी, पी. अमीर्थम और शरद कुमार शामिल हैं।

विशेष अदालत ने राजा के पूर्व निजी सचिव आर. के. चंदोलिया, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, रिलायंस अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप के शीर्ष अधिकारी गौतम दोषी, सुरेंद्र पिपारा और हरि नायर और यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा को भी बरी कर दिया था।

सीबीआई मामले में बरी हुए व्यक्तियों की सूची में स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा व विनोद गोयनका और कुसेगांव फ्रूट्स एंड वेजीटेबल्स के निदेशक आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल शामिल हैं।

 

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