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मामल्लापुरम में सॉफ्ट स्टोन मूर्ति बाजार पर संकट के बादल

चेन्नई, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)| विश्व प्रसिद्ध मामल्लापुरम में हैवी स्टोन/ब्ल्यू मेटल मूर्ति निर्माताओं के अच्छा व्यापार करने के बावजूद सॉफ्ट स्टोन से मूर्ति बनाने का व्यापार धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। सॉफ्ट स्टोन से मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकारों ने हार्ड स्टोन/ब्ल्यू मेटल से मूर्ति बनाना शुरू कर दिया है।

समुद्र तट पर बसा मामल्लापुरम यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है। यह शहर पत्थरों की मूर्ति तथा चट्टानों को काट कर बनाए गए पल्लव कालीन मंदिरों के लिए जाना जाता है।

यहां बनी ज्यादातर इमारतें 630-670 ईसापूर्व में नरसिम्हावर्मन प्रथम के काल की बनी हुई हैं।

मयन हैंडीक्राफ्ट्स के मालिक मयन राजेश ने आईएएनएस से कहा, “सॉफ्ट स्टोन से मूर्ति बनाने का व्यापार मंदी में है। मूर्तियां हस्तनिर्मित हैं और पत्थरों की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे मूर्तियों की कीमतें भी बढ़ गई हैं।”

राजेश के अनुसार, सॉफ्ट स्टोन को राजस्थान और झांसी जैसे दूर-दराज के स्थानों से लाना पड़ता है।

जीबीएस स्टोन कार्विग के आर. अनिल कुमार ने आईएएनएस से कहा, “जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने से पहले प्रति टन कीमत लगभग 8,000 रुपये थी और अब इसकी कीमत 10 से 12 हजार रुपये तक है। पत्थर की उपलब्धता भी अब मुश्किल हो रही है।”

अब 55 साल के हो चुके कुमार ने कहा, “मामल्लापुरम में मूर्तिकला आम तौर पर पारिवारिक पेशा है। मेरे पिता रोज वुड और उसके बाद गाय के सींगों में नक्काशी किया करते थे। सींगों पर नक्काशी पर प्रतिबंध के बाद उन्होंने सॉफ्ट स्टोन की नक्काशी शुरू कर दी और 28 साल की आयु में मैं उनके साथ जुड़ गया।”

उन्होंने कहा, “लेकिन मैं नहीं चाहता कि मेरे बेटे भी मेरे साथ काम करें क्योंकि यह व्यापार खत्म हो रहा है और कई लोग हार्ड स्टोन की नक्काशी करने लगे हैं।”

उनके अनुसार, यहां आने वाले विदेश पर्यटक किफायती होते हैं इसलिए यहां इनकी बिक्री कम होती जा रही है।

पहले यहां आमतौर पर विदेशी पर्यटक ही खरीदारी करते थे लेकिन अब यहां भारतीय पर्यटक भी खरीदारी करते हैं। कुमार ने कहा कि बुद्ध, गणेश, शिव लिंगम, नंदी और पशु जैसे हाथी की मूर्तियां यहां पहले धड़ल्ले से बिकती थीं।

 

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