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भारत को ओलंपिक की मेजबानी करते देखना चाहती हूं : नीता अंबानी

लंदन, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)| अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की सदस्य और रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक चेयरपर्सन नीता अंबानी ने कहा है कि उनका सपना है कि भविष्य में भारत ओलंपिक और फीफा विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों की मेजबानी करे। नीता अंबानी ने खेलों की दुनिया के वैश्विक नेताओं के महत्वपूर्ण सम्मेलन लीडर्स वीक 2019 लंदन में ‘इंस्पायरिंग ए बिलियन ड्रीम्स : द इंडिया अपॉर्चूनिटी’ विषय पर दिए अपने भाषण में बताया कि कैसे भारत दुनिया में खेलों के क्षेत्र में सुपर पॉवर बन सकता है।

नीता ने कहा, “कोई भी कारण नहीं है कि क्यों 1.3 अरब लोगों का यह देश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वालों में अग्रणी नहीं बन सकता। यह मेरी उम्मीद और सपना है कि भारत को विश्व की खेलकूद की सबसे प्रतिष्ठित चैंपियनशिप जैसे ओलंपिक और फीफा विश्व कप का आयोजन करते देखूं। मैं आप सबको आमंत्रित करती हूं कि आप भी हमारे साथ जुड़िए और इस महान भारत के सपने का हिस्सा बनिए।”

रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता ने देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा सरकार की तारीफ की और कहा, “हम सभी भाग्यशाली हैं क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भारत में खेल को एक वैश्विक शक्ति में बदलने की व्यापक दृष्टि है। इस समय भारत में विश्व स्तर पर योग को बढ़ावा देने के अलावा प्रधानमंत्री ने खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में दो नई पहल की हैं। इनमें पहला ‘खेलो इंडिया’ प्रोग्राम है और दूसरा महत्वकांक्षी प्रोग्राम ‘फिट इंडिया’ है।”

उन्होंने कहा, “भारत तेजी से दुनिया में खेलों के क्षेत्र में एक शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत आपके लिए लोकतंत्र, विविधता, डेमोग्राफी और विकास का अनोखा मेल पेश करता है। नया भारत वह जमीन है जो आप सभी का खुली बाहों से स्वागत करता है।”

देश में खेलों की बढ़ती ताकत की मिसाल क्रिकेट की लीग आईपीएल है। पहले के दस सालों में आईपीएल के मीडिया राइट्स 950 मिलियन अमेरिकी डॉलर में बिके थे। पिछले साल आईपीएल के अगले पांच सालों के मीडिया अधिकार 2.5 बिलियन यूएस डॉलर में बेचे गए हैं। पांच वर्षो में यह 500 प्रतिशत की चौंका देने वाली वृद्धि है।

भारत को खेलों से प्यार करने वाला देश बताते हुए नीता ने कहा कि भारत के विश्व कप के फाइनल में नहीं पहुंचने के बावजूद 18 करोड़ भारतीयों ने इसे टीवी पर देखा जबकि इंग्लैंड में केवल डेढ़ करोड़ लोगों ने ही इसे टीवी पर देखा।

 

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