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दिल्ली सरकार ने स्तनपान कक्ष बनाने के लिए नीति का मसौदा तैयार किया

 नई दिल्ली, 10 सितम्बर (आईएएनएस)| वैश्विक प्रचलन को अपनाने के लिए दिल्ली सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय राष्ट्रीय राजधानी में स्तनपान और चाइल्डकेयर कक्ष बनाने की संभावना तलाश रहा है।

 यह ऐसे कक्षों के निर्माण को आसान बनाने के लिए उपनियमों में संशोधन करने के तरीकों को भी देख रहा है।

सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया है कि उसने बच्चे को स्तनपान कराने वाले कक्ष के निर्माण के लिए एक नीति का मसौदा तैयार किया और जनता से टिप्पणी और सुझाव मांगे। सुझाव के लिए मसौदा नीति को संबंधित विभागों के साथ भी साझा किया गया है।

सरकार भविष्य की निर्माण योजनाओं में इसे शामिल करने और नीति को लागू करने के लिए कानूनों का निर्माण का इसमें संशोधन की संभावना तलाश रही है

नई दिल्ली, दक्षिण दिल्ली नगर निगमों, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), महिला एवं बाल विभाग और शहरी विकास विभाग जैसे संगठनों के साथ परामर्श पहले ही हो चुका है।

बच्चे को स्तनपान कराए जा सकने वाले कमरे बनाने का उद्देश्य ऐसे माहौल को बनाना है, जो माता को सुरक्षा, आराम प्रदान करने के साथ अपने बच्चे को सुरक्षित व स्वच्छ स्थान पर स्तनपान कराने में मदद करता है।

सरकार ने नौ महीने के अवयान की मां नेहा रस्तोगी व वकील अनिमेष रस्तोगी के माध्यम से दायर एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को दिए हलफनामे में कहा, “इसका उद्देश्य जनोपयोगी विभागों और अन्य के लिए स्तनपान कराने वाली माताओं और उनके बच्चे के लिए फैसिलिटी स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश तैयार करना है। याचिका में स्तनपान कराने वाली माताओं और उनके बच्चों को पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गई थी।

सरकार ने सुझाव दिया है कि एक आदर्श नसिर्ंग रूम ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए जिसमें सिंक, मिरर आदि होना चाहिए। डायपर बदलने की सुविधा और वाशरूम होना चाहिए।

कमरे का आकार पर्याप्त होना चाहिए और दिव्यांगो सहित सभी के लिए आसानी से सुलभ होना चाहिए। अवांछित लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए एक महिला परिचर को बाहर तैनात किया जा सकता है और आपात स्थिति में किसी को बुलाने के लिए मां को फ्लाइट बटन के साथ एक इमरजेंसीअलार्म/ बेल बटन की सुविधा मिलनी चाहिए।

इसमें रोशनी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। हवादार होना चाहिए और बच्चे के अनुकूल वातावरण होना चाहिए। एक अलग कमरे के लिए जगह की अनुपलब्धता के मामले में माताओं की निजता के लिए नसिर्ंग एरिया को पर्दे से ढका जा सकता है या फ्लेक्स दीवारों के साथ कवर करना चाहिए।

राज्य सरकार शिशु के समग्र विकास और माता व शिशु के बीच संबंध को मजबूत करने के मकसद से स्तनपान को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक रूप से प्रचार और जागरूकता अभियान चलाएगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ के अनुसार, शिशुओं को पहले छह महीनों तक विशेष रूप से स्तनपान कराया जाना चाहिए और पूरक आहार की शुरुआत के बाद भी स्तनपान दो साल और आगे भी जारी रखना चाहिए।

नीति के कुछ मुख्य बिंदु :

बच्चे के पोषण के लिए मां के जैविक और प्राकृतिक अधिकार को सुनिश्चित करना।

नर्सिग कक्ष सभी बस टर्मिनलों और डिपो, रेलवे स्टेशनों, प्रमुख मेट्रो स्टेशनों, अदालत परिसर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सरकारी और निजी वाणिज्यिक भवनों, सिनेमा हॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और मॉल में स्थापित किए जाने चाहिए और

चाइल्डकेयर रूम तक आसानी से पहुचं सकने के लिए उस जगह के पास साइन बोर्ड लगाया जाएगा।

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