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चीन की तर्ज पर अर्थक्रांति लाएगी सरकार

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)| चीन की तर्ज पर किसान सहकारी को बढ़ावा देकर भारत के गांवों में अर्थक्रांति लाने के लिए मोदी सरकार 100 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘युवा-सहकार’ नाम से एक नवाचारी योजना शुरू करने जा रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर 11 अक्टूबर को भारत अंतर्राष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेला (आईआईसीटीएफ)-2019 में इस योजना का शुभारंभ करेंगे।

भारत सरकार की स्टार्टअप और स्टैंडअप कार्यक्रमों की तरह युवाओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने ‘युवा सहकार सहकारी उद्यम सहायता व नवाचारी योजना’-2019 की परिकल्पना की है।

सरकार ने ‘युवा सहकार सहकारी उद्यम सहायता व नवाचारी योजना’ का सालाना बजटीय आवंटन 100 करोड़ रुपये रखा है।

मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, इस योजना में देश के पूर्वोत्तर इलाके के सहकारी संस्थाओं के साथ-साथ नीति आयोग द्वारा चिन्हित आकांक्षी जिलों में पंजीकृत सहकारी और शतप्रतिशत महिला/ अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति और शारीरिक रूप से अशक्त सदस्य वाले सहकारी को विशेष प्रमुखता दी जाएगी।

चीन में 1990 के दशक के उत्तरार्ध में किसान सहकारी की तादाद में तेजी से वृद्धि हुई और 2007 में किसान पेशेवर सहकारी के लिए राष्ट्रीय कानून लाया गया जिससे किसान पेशेवर सहकारी की स्थापना और उसके प्रबंधन में सरकार की ओर से काफी मदद मिली और किसानों में उद्यमिता का विकास हुआ।

देश की राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में 11 अक्टूबर से भारत अंतर्राष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेले का आगाज होने जा रहा है, जिसमें 120 से अधिक भारतीय सहकारी संस्थाएं व 20 केंद्रीय व राज्य स्तरीय संगठनों के अलावा 35 देश हिस्सा ले रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक सहयोगी संगठन सहकार भारती सहकारी आंदोलन के फायदे से जनसमूह को रूबरू कराने के लिए मेले के उद्घाटन समारोह में ‘सिंप्लीदेसी’ ब्रांड प्रदर्शित करने जा रहा है।

भारत में पहली बार इस प्रकार के मेले का आयोजन हो रहा है, जिसका मकसद कृषि व सहकारी क्षेत्र के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है।

केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने मंगलवार को कहा, “वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाना आवश्यक है। इसलिए कृषि निर्यात नीति 2018 में कृषि उत्पादों का निर्यात 2022 तक बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है।”

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के निर्यात का मूल्य इस समय करीब 30 अरब डॉलर है, जिसे बढ़ाकर 2022 तक 60 अरब डॉलर से ज्यादा करना है।

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने और किसानों को लाभकारी मूल्य प्रदान करने के लिए उत्पादों की ब्रैंडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को प्रोत्साहन देने की जरूरत है, जिसमें सहकारी संगठनों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि यह मेला उनके लिए एक मंच होगा, जिसका उपयोग वे दूसरे देशों के संगठनों के अनुभव जानने और अपने अनुभव साझा करने में कर सकेंगे।

मेले का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की अगुवाई में किया जा रहा है।

मेले के आयोजकों में बैंकॉक स्थित अंतर्राष्ट्रीय संगठन नेडेक, भारतीय संगठन, नैफेड, एपीडा, आईटीपीओ शामिल हैं।

मेले में आस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, जापान, नेपाल, बांग्लादेश, मॉरीशस, श्रीलंका, वियतनाम, ब्रिटेन, अमेरिका व अन्य देशों के संगठन अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाएंगे।

मेले में तेलंगाना, हरियाणा, उत्तराखंड, पुडुचेरी, मेघालय और गोवा साझेदार हैं।

उल्लेखनीय है कि मेले का उद्घाटन 11 अक्टूबर को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर करेंगे, जबकि 13 अक्टूबर को मेले के समापन समारोह में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल शिरकत करेंगे।

 

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